1️⃣ दिमाग़ हर समय डोपामिन (सोशल मीडिया, कॉफ़ी, चाय ,चीनी) का पीछा करता है।
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2️⃣ नर्वस सिस्टम लगातार लड़ो या भागो की अवस्था में फँसा रहता है। 3️⃣ मौन दबे हुए डर और भावनाएँ सतह पर ले आता है। 4️⃣ समाज “करने” को महिमा देता है, “होने” को नहीं। 5️⃣ रजस (चंचलता) और तमस (जड़ता) मन को शांत होने नहीं देते।
समाधान → सत्त्व का संवर्धन: स्पष्टता, संतुलन और सामंजस्य। ( स्वानुभव के माध्यम से) वैद्य एस के राय, जगोत्तम आयुर्वेद पंचकर्म केंद्र, प्रयागराज 🙏