जगोत्तम आयुर्वेद एवं पंचकर्म केन्द्र, प्रयागराज
By Dr. S. K. Rai (B.A.M.S., Gold Medallist, Ayurvedacharya) | 30+ वर्षों का क्लिनिकल अनुभव
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग अक्सर एक बार भोजन बनाकर उसे पूरे दिन कई बार गर्म करके खाते हैं। माइक्रोवेव में बार-बार गर्म किया गया भोजन सुविधाजनक तो लगता है, लेकिन क्या यह वास्तव में हमारे स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है?
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस आदत के प्रति सावधान रहने की सलाह देते हैं।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में पुनः गर्म किए गए भोजन को “पुनः उष्णीकृत आहार” कहा गया है।
ऐसा भोजन:
- वीर्यहीन (पोषण शक्ति रहित) हो जाता है।
- शरीर में आम (Toxins) उत्पन्न करता है।
- पाचन अग्नि को कमजोर करता है।
- धीरे-धीरे अनेक रोगों की शुरुआत कर सकता है।
आयुर्वेद का मुख्य सिद्धांत है—
“ताजा भोजन ही श्रेष्ठ औषधि है।”
आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?
आधुनिक शोधों के अनुसार भोजन को बार-बार गर्म करने से:
✔ Heat-sensitive Vitamins (Vitamin C, B Complex) नष्ट होने लगते हैं।
✔ बार-बार गर्म करने से भोजन की गुणवत्ता कम होती जाती है।
✔ यदि भोजन सही तापमान पर सुरक्षित न रखा जाए तो बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।
✔ कुछ खाद्य पदार्थों में बार-बार गर्म करने से अवांछित रासायनिक परिवर्तन हो सकते हैं।
किन खाद्य पदार्थों को बार-बार गर्म करने से बचें?
- पकी हुई दाल
- चावल
- तली हुई सब्जियाँ
- पालक
- चिकन एवं अन्य प्रोटीन युक्त भोजन
- आलू
- अंडा
बार-बार गर्म भोजन खाने के संभावित दुष्प्रभाव
- अपच
- गैस
- एसिडिटी
- पेट फूलना
- कब्